युजवेन्द्र चहल की जीवनी | Yuzvendra Chahal Biography in Hindi

By | October 5, 2017

युजवेन्द्र चहल भारतीय क्रिकेट टीम के नायाब हीरो है, जो इंटरनेशनल शतरंज प्लेयर भी रह चुके हैं और वह एक शतरंज चैंपियन भी हैं| उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर कई शतरंज चैंपियनशिप भी जीती| चहल शतरंज और क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाला एकमात्र व्यक्ति है | चहल शतरंज और क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाला एकमात्र व्यक्ति है।

युजवेन्द्र चहल की जीवनी | Yuzvendra Chahal

Yuzvendra Chahal Family: यूजवेन्द्र चहल का जन्म 23 जुलाई 1990 (उम्र 26) जिंद, हरियाणा, भारत में मिडल क्लास फैमिली में हुआ था। उनके पिता के के चहल जींद कोर्ट के एडवोकेट है और माँ सुनीता देवी हाऊस वाइफ़ है।परिवार में सबसे छोटे यूजवेन्द्र की दो बड़ी बहनें है, जो ऑस्ट्रेलिया में रहती है। प्रोफेशनल लाइफ में एक श्रेष्ठ बॉलर माने जाने वाले युजवेन्द्र चहल पर्सनल लाइफ में फ्रेंड पार्टीस के लिए जाना जाता है। वे कभी फ्रेंड पार्टीस से दूर नहीं रहते हैं। आप उनकी पार्टियों की झलक आसानी से सामाजिक साइटों पर देख सकते हैं। इन पार्टियों में उनकी एक खास दोस्त हमेशा दिखती है, लेकिन उनके बारे में कभी कोई समाचार नहीं हुआ| यूजवेन्द्र की दोस्ती ऑस्ट्रेलिया और रॉयल चैलेंजर बैंगलोर के सीनियर बॉलर मिशेल स्टार्क से खूब जमती है।

यूजवेन्द्र की स्कूली शिक्षा जींद के डीएवी पब्लिक स्कूल से हुई, लेकिन उनका पढ़ाई ज्यादा मन नहीं लगता था। पर वे क्रिकेट और चेस के बड़े प्रेमी थे। इसलिए मात्र सात की उम्र से चेस खेलना स्टार्ट कर दिया था और साथ ही क्रिकेट भी। और देखते ही देखते अपने जुनून और कड़ी मेहनत के कारण वे अपने क्षेत्र के दिग्गज चेस मास्टर को मात देने लगे, जिससे उन्हें जल्द ही मात्र 10 की उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर चेस में अपना जौहर दिखाने का मौका मिला। जहां उन्होंने 2002 में राष्ट्रीय स्तर पर अंडर -12 की राष्ट्रीय बाल चैम्पियनशिप जीती थी, जो उनकी पहली राष्ट्रीय चैम्पियनशिप। जिसने उन्हें पहली बार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ग्रीस में आयोजित जूनियर विश्व शतरंज चैंपियनशिप में भारत के लिए रिप्रेजेंट होने का मौका मिला|

Chess Player: इसके अलावा अंडर -16 राष्ट्रीय शतरंज चैम्पियनशिप का भी हिस्सा रह चुके हैं। इस दौरान कभी वे क्रिकेट से अलग नहीं हुए, बल्कि उनके पिता की ख़्वाहिश थी कि उनका बेटा कामयाब हो। इसलिए जब उन्होंने क्रिकेट खेलने की इच्छा जाहीर की तो उन्होंने अपने पुश्तैनी डेढ़ एकड़ जमीन को क्रिकेट पिच के रूप में तैयार करवा दिया, जहां वे नियमित रूप से प्रैक्टिस किया करते थे। 2006 में जब उन्हें अपने चेस गेम के लिए स्पोंसर्स मिलने बंद हो गए तो तब उनके सामने सबसे बड़ी विपदा आई कि कैसे वे इस खेल पर खर्च होने वाले 60 लाख रुपये प्रति साल जुटा पाएंगे। इसलिए उन्होंने चेस क्विट कर दी और क्रिकेट को ही अपना नं- 1 पैशन बना लिया।

इसके बाद अपने फ़ैमिली क्रिकेट पिच पर खेलते हुए उन्होंने स्टेट अंडर 14 टीम में अपनी जगह बना ली। इसी तरह स्टेट अंडर-15, 16, 17, 19, 23 और 25 टीम में भी अपनी प्रतिभा दिखाई।पर वे लाईमलाईट तब आए, जब उन्होंने 2009 में स्टेट अंडर-19 के लिए घातक बॉलिंग करते हुए बिहार ट्रॉफी में सर्वश्रेष्ठ 34 विकेट्स लेनें में कामयाब रहे। जिसके कारण उन्हें जल्द ही हरियाणा की रणजी टीम का हिस्सा बनाया गया और 3 नवंबर 2009 को मध्य प्रदेश के खिलाफ डेब्यू किया।

Yuzvendra Chahal Career: चहल को पहली बार 2011 में मुंबई इंडियंस ने साइन किया था। वह तीन सत्रों में टीम के लिए केवल एक आईपीएल खेल में दिखाई दिया, लेकिन 2011 चैंपियंस लीग ट्वेंटी 20 में सभी मैचों में खेले| जहां उन्हें हरभजन सिंह से बहुत कुछ सीखने मिला| उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाफ फाइनल में 3 ओवर में 9 रन पर 2 रन बनाए, जबकि मुंबई ने 13 9 रनों की पारी का मुकाबला किया। 2014 के आईपीएल खिलाड़ियों की नीलामी में, उन्हें 10 लाख के आधार मूल्य के लिए रॉयल चैलेंजर्स ने खरीदा था। उन्होंने जल्द ही बेहतरीन परफ़ोर्मेंस देते हुए उनपर लगे पैसे को सही साबित किया। उन्हें आईपीएल 2014 में दिल्ली डेयरडेविल्स के खिलाफ मैन ऑफ दी मैच का पुरस्कार मिला| इस बेहतरीन परफ़ोर्मेंस ने शीघ्र ही उन्हें 2016 में ज़िम्बाब्वे की ट्रिप पर जाने वाली भारतीय क्रिकेट टीम के लिए टिकट कटा दिया। यहाँ उन्होंने संतुष्टपूर्ण परफ़ोर्मेंस दी। 2016 के आईपीएल सीजन में उन्होंने 21 विकेट्स चटकाएँ, जिससे वो भुवनेश्वर कुमार के बाद दूसरे लीड विकेट टेकर बने। बेहतरीन परफ़ोमेंस और इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट और ODI सीरीज जीतने के बाद स्टार बॉलर रविन्द्र चंद अश्विन और रवीन्द्र जडेजा को रेस्ट दे दिया गया, जिनकी जगह इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की टी-20 सीरीज में यूजवेन्द्र को लेगस्पिनर की तौर पर शामिल किया गया। और उन्होंने तीसरे और अंतिम टी-20 मैच में करिश्माई बॉलिंग करते हुए चार ओवरों में मात्र 25 रन देकर 6 विकेट झटकें, जो किसी भी भारतीय का टी-20 में सर्वश्रेष्ठ बॉलिंग फिगर और वर्ल्ड क्रिकेट का अजंता मेंडिस (6/8, 6/16) के बाद तीसरा सर्वश्रेष्ठ बॉलिंग फिगर है।इस परफ़ोमेंस के बदौलत एक बार मजबूत स्थिति में दिख रही इंग्लैंड को भारत ने 75 रनों की बड़ी अंतर से करारी हार दी|

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